संत रामपाल का नए साल पर धमाका, नए जिले हांसी में उमड़ा जनसैलाब
Haryana News 24 (हांसी, हरियाणा): हरियाणा के नए जिले हांसी में कड़ाके की ठंड और बरसात के बावजूद संत रामपाल जी महाराज के सम्मान में आयोजित ‘जनसेवक रतन सम्मान समारोह’ में भारी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। इस कार्यक्रम का आयोजन मुख्य रूप से बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा के दौरान संत रामपाल जी और उनके अनुयायियों द्वारा की गई निस्वार्थ सेवा के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए किया गया था [13:39]।

आपदा के समय ‘भगवान’ बनकर आए संत: नरेश कुमार
आयोजक और समाजसेवी नरेश कुमार ने बताया कि पिछले दिनों हरियाणा समेत नौ राज्यों में आई बाढ़ की त्रासदी के दौरान जब किसान अपनी फसलें बचाने की उम्मीद छोड़ चुके थे, तब संत रामपाल जी महाराज ने एक ‘मसीहा’ के रूप में मदद का हाथ बढ़ाया। उन्होंने बताया कि सरकारी प्रयासों की अपनी सीमाएं होती हैं, लेकिन संत के अनुयायियों ने दिन-रात एक करके खेतों से पानी निकाला और किसानों की फसलों को बर्बाद होने से बचाया [02:32]। नरेश कुमार ने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है, बल्कि यह विशुद्ध रूप से सेवा भाव का सम्मान है [03:41]।

सरपंचों और विभिन्न संस्थाओं की एकजुटता
समारोह में हांसी और आसपास के क्षेत्रों के सैकड़ों सरपंच, विभिन्न समाजों के प्रधान, डेरों के प्रतिनिधि और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि संत रामपाल जी ने न केवल कृषि क्षेत्र में मदद की, बल्कि गरीब कन्याओं की शादी, गरीबों के लिए मकान बनवाना और अन्नपूर्णा मुहिम जैसी कई सामाजिक सेवाएं भी जारी रखी हैं [03:29]।
गुरुकुल परंपरा से जुड़े प्रबुद्ध वर्ग का भी मिला समर्थन
कार्यक्रम में मौजूद एडवोकेट राम अवतार ने बताया कि वे स्वयं आर्य समाजी परिवार और गुरुकुल परंपरा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि संत रामपाल जी के शिष्यों में शराब, नशा, भ्रष्टाचार और दहेज प्रथा से दूरी जैसे नैतिक गुणों को देखकर वे काफी प्रभावित हुए। उन्होंने संत रामपाल जी को ‘श्रेष्ठ आर्य’ (श्रेष्ठ व्यक्ति) बनाने वाला बताया [12:34]।

प्रशासनिक और कानूनी पक्ष पर चर्चा
इंटरव्यू के दौरान जब संत रामपाल जी के जेल में होने पर सवाल पूछा गया, तो नरेश कुमार ने कहा कि यह न्यायालय का विषय है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संत रामपाल जी पहले ऐसे संत हैं जिन्होंने जेल जाने के बाद से अब तक एक बार भी पैरोल नहीं मांगी है [06:31]। उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी सेवा भावना को देखते हुए उन्हें जल्द न्याय मिलेगा।

विपरीत मौसम पर भारी पड़ा जन-समर्थन
हांसी में पारा 12 डिग्री तक गिर चुका था और भारी धुंध के कारण विजिबिलिटी न के बराबर थी, इसके बावजूद लोग बैलगाड़ियों, ऊंट गाड़ियों और पैदल ही समारोह स्थल तक पहुंचे [10:14]। सड़कों पर भारी जाम की स्थिति देखी गई, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि संत के प्रति लोगों में कितनी गहरी आस्था और कृतज्ञता है।
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