500+ शुगर लेवल अब बीते कल की बात: ऋषि हर्बल आयुर्वेदा
Haryana News 24: आज के आधुनिक युग में शुगर (Diabetes) एक ऐसी वैश्विक समस्या बन चुकी है, जिससे करोड़ों लोग प्रभावित हैं। अक्सर यह माना जाता है कि एक बार शुगर होने के बाद जीवनभर मीठे से परहेज और दवाइयों पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के डेरौली जाट गांव में स्थित ‘ऋषि हर्बल आयुर्वेद’ ने इस धारणा को बदल दिया है। यहाँ की पारंपरिक आयुर्वेदिक पद्धति से उन मरीजों को भी नया जीवन मिल रहा है, जिनका शुगर लेवल 500 से ऊपर रहता था।
सफलता की कहानी: रमेश डागर (गांव सेहलंगा, झज्जर) का जीवंत प्रमाण
झज्जर जिले के गांव सेहलंगा के निवासी रमेश डागर की कहानी आयुर्वेद की प्रभावशीलता का सबसे बड़ा उदाहरण है।
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गंभीर स्थिति: रमेश डागर का शुगर लेवल खाली पेट 395 और खाना खाने के बाद 575-580 तक पहुंच जाता था। [01:15]
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शारीरिक कष्ट: अत्यधिक शुगर के कारण उन्हें रात में 20 से 25 बार शौचालय जाना पड़ता था, पैरों में भारी थकान और क्रैम्प्स रहते थे, यहाँ तक कि उनका चलना-फिरना भी दूभर हो गया था। [03:41], [11:46]
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ऋषि हर्बल का प्रभाव: ऋषि हर्बल आयुर्वेद से इलाज शुरू करने के मात्र 10-12 दिनों में उनकी बार-बार यूरिन जाने की समस्या समाप्त हो गई। [04:30]
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वर्तमान स्थिति: लगभग 8-9 महीने के नियमित उपचार और परहेज के बाद, अब उनका शुगर लेवल बिल्कुल सामान्य (95-110) रहता है। सबसे बड़ी बात यह है कि अब वे बिना किसी डर के हलवा, चूरमा, गुलाब जामुन और गाजर का हलवा जैसे मीठे व्यंजनों का आनंद ले रहे हैं। [06:52], [10:12]
ऋषि हर्बल आयुर्वेद की विशेषताएं
ऋषि हर्बल आयुर्वेद के संचालक वैद्य ऋषिपाल की कार्यशैली उन्हें अन्य केंद्रों से अलग बनाती है:
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परहेज की अनिवार्यता: वैद्य का स्पष्ट मानना है कि आयुर्वेदिक औषधि तभी प्रभावी होती है जब मरीज अनुशासित रहकर परहेज करे। वे उन्हीं मरीजों का उपचार करते हैं जो संयम रखने को तैयार हों। [12:41]
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किफायती उपचार: जहाँ आधुनिक अस्पतालों में इलाज लाखों में होता है, वहीं ऋषि हर्बल में 40-50 दिनों की औषधि की लागत मात्र ₹1600 से ₹1700 के बीच है। यह इसे गरीब से गरीब व्यक्ति के लिए सुलभ बनाता है। [13:28], [15:54]
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प्राकृतिक और शुद्ध औषधि: यहाँ औषधियां स्वयं शुद्ध जड़ी-बूटियों (जैसे गुदंबा (इंद्रायण) और अन्य दुर्लभ जड़ी-बूटियां) से तैयार की जाती हैं, जिनका शरीर पर कोई दुष्प्रभाव (Side Effect) नहीं होता। [15:49]
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व्यक्तिगत मार्गदर्शन: इलाज के दौरान समय-समय पर मरीज की प्रगति की जानकारी ली जाती है और धीरे-धीरे उन्हें मीठा खाने की अनुमति दी जाती है। [05:47]
उपचार के दौरान प्रमुख सावधानियां और जीवनशैली
रमेश डागर के अनुभव के अनुसार, उपचार के शुरुआती दौर में इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:
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गेहूं के बजाय जौ और चने की रोटी का सेवन। [09:20]
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दूध के स्थान पर लस्सी और दही का उपयोग। [09:31]
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नियमित व्यायाम और वैद्य द्वारा बताए गए प्राकृतिक पत्तों (जैसे अमरूद या बड़बेर के पत्ते) का सेवन। [07:50]
निष्कर्ष: क्या आप भी शुगर मुक्त जीवन चाहते हैं?
ऋषि हर्बल आयुर्वेद ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और शुद्ध आयुर्वेदिक औषधियों का सहारा लिया जाए, तो मधुमेह जैसी बीमारी को न केवल नियंत्रित किया जा सकता है, बल्कि एक सामान्य जीवन की वापसी भी संभव है।
अस्वीकरण: यह लेख एक सफल केस स्टडी और वीडियो रिपोर्ट पर आधारित है। किसी भी प्रकार का उपचार शुरू करने से पहले संबंधित वैद्य या विशेषज्ञ से व्यक्तिगत परामर्श अवश्य लें।
वीडियो साभार: हरियाणा न्यूज़ 24 यहाँ देखें
