पूर्व मंत्री ने ही सरकार को दी आंदोलन की खुली चेतावनी, हरियाणा में सियासी तूफान
Haryana News 24 (महेंद्रगढ़/नांगल चौधरी): दक्षिण हरियाणा की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले कोरियावास मेडिकल कॉलेज की बदहाली अब एक बड़े सियासी और सामाजिक उबाल का रूप ले रही है। नांगल चौधरी के पूर्व विधायक और कद्दावर नेता डॉ. अभय सिंह यादव ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए प्रशासन और सरकार को 6 महीने का अल्टीमेटम दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में कॉलेज की व्यवस्थाएं नहीं सुधरीं, तो वे जनता के साथ सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेंगे।
क्या है पूरा मामला?
करोड़ों रुपये की लागत से बना कोरियावास मेडिकल कॉलेज क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण बनकर उभरा था। लेकिन, भव्य इमारतों के पीछे की हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। डॉ. अभय यादव का आरोप है कि कॉलेज को जानबूझकर “सफेद हाथी” बनाया जा रहा है।
मुख्य समस्याएं और मांगें:
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विशेषज्ञों का अभाव: ओपीडी शुरू होने के बावजूद वहां सुपर-स्पेशलिटी डॉक्टरों की भारी कमी है। गंभीर बीमारियों के लिए मरीजों को आज भी जयपुर, गुरुग्राम या रोहतक के चक्कर काटने पड़ते हैं।
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मशीनों की बर्बादी: करोड़ों की लागत से आई आधुनिक मशीनें और उपकरण धूल फांक रहे हैं। तकनीकी स्टाफ न होने के कारण इनका लाभ जनता को नहीं मिल रहा।

डॉ. अभय यादव का ‘अल्टीमेटम’ और तीखे प्रहार
हालिया जनसभाओं में पूर्व मंत्री का तेवर काफी आक्रामक नजर आया। उन्होंने खुले तौर पर कहा:
“मैं 6 महीने का समय दे रहा हूं। अगर इस दौरान कॉलेज में सुविधाएं सुनिश्चित नहीं की गईं और इसे सुचारू रूप से नहीं चलाया गया, तो हम उसी भाषा में बात करेंगे जो सरकार को समझ आती है। 6 महीने बाद आंदोलन का रास्ता ही हमारा अंतिम विकल्प होगा।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ “अदृश्य शक्तियां” और निहित स्वार्थी तत्व इस प्रोजेक्ट को विफल करने की साजिश रच रहे हैं ताकि क्षेत्र के विकास को रोका जा सके।
क्यों जरूरी है यह आंदोलन?
महेंद्रगढ़ जिला लंबे समय से बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए तरस रहा है। कोरियावास मेडिकल कॉलेज न केवल इलाज का केंद्र है, बल्कि:
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यह हजारों युवाओं के लिए मेडिकल शिक्षा का द्वार खोलेगा।
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स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा।
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रेवाड़ी, महेंद्रगढ़ और राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों के लिए लाइफलाइन बनेगा।
