बाढ़ पीड़ितों के मसीहा बने संत रामपाल, किसानों ने ‘किसान रक्षक’ अवार्ड से नवाजा
जुलाना, जींद (हरियाणा): हरियाणा के जींद जिले के जुलाना में आयोजित एक भव्य समारोह में संत रामपाल महाराज के प्रति जनसैलाब उमड़ पड़ा। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद हजारों की संख्या में किसान, बुद्धिजीवी और उनके अनुयायी उन्हें ‘किसान रक्षक सम्मान’ से सम्मानित करने के लिए एकजुट हुए।

बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए मिला सम्मान:
समारोह का मुख्य उद्देश्य संत रामपाल महाराज द्वारा समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए अभूतपूर्व कार्यों को सराहते हुए उन्हें सम्मानित करना था। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बताया कि पंजाब, राजस्थान और हरियाणा में आई भीषण बाढ़ के दौरान संत रामपाल महाराज और उनके अनुयायियों ने निस्वार्थ भाव से जल निकासी और पीड़ितों की सहायता में बड़ी भूमिका निभाई थी। इसी के उपलक्ष्य में किसान संगठनों और खाप पंचायतों ने उन्हें ‘किसान रक्षक सम्मान’ दिया [02:27]।

अन्नपूर्णा मुहिम की वैश्विक चर्चा:
कार्यक्रम में मौजूद बुद्धिजीवियों ने संत रामपाल महाराज द्वारा चलाई जा रही ‘अन्नपूर्णा मुहिम’ पर विशेष प्रकाश डाला। अनुयायियों का कहना है कि यह मुहिम केवल भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका के शिकागो जैसे शहरों में भी जरूरतमंदों को रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान कर रही है [06:56]। किसानों का मानना है कि संत जी ने उनकी “फसल और नस्ल” दोनों को बचाने का कार्य किया है [01:29]।
बिना पुलिस प्रशासन के अद्भुत अनुशासन:
रिपोर्ट के अनुसार, जुलाना में हुए इस कार्यक्रम में पैर रखने तक की जगह नहीं थी, फिर भी वहां का अनुशासन देखने लायक था। जहां राजनेताओं की रैलियों में हजारों पुलिसकर्मियों के बावजूद अव्यवस्था और जाम की स्थिति बन जाती है, वहीं संत रामपाल के अनुयायियों ने बिना किसी सरकारी पुलिस बल के स्वयं ही यातायात और व्यवस्था को संभाला। अनुयायियों ने इसे “बिना प्रशासन, अनुशासन” का नाम दिया और इसे संत रामपाल महाराज की शिक्षाओं का असर बताया [03:02]।

जेल में होकर भी भक्तों के बीच सक्रिय होने का दावा:
जब संत जी के जेल में होने पर सवाल पूछा गया, तो उनके समर्थकों ने भावुक होते हुए कहा कि “संत रामपाल महाराज एक विचारधारा हैं, उन्हें जेल की चारदीवारी में बंद नहीं किया जा सकता।” अनुयायियों का मानना है कि जेल में रहते हुए भी उनके मार्गदर्शन में विश्वव्यापी समाज सेवा के कार्य निर्बाध रूप से चल रहे हैं [06:05]।
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