10 साल का रिकॉर्ड टूटा, आलू के रेट में ऐतिहासिक गिरावट, चढूनी ने CM से मांगा जवाब

किसानों का कहना है कि वर्तमान में आलू के दाम इतने कम हैं कि उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान गुरजीत सिंह ने बताया कि उन्होंने 14 एकड़ में आलू लगाया है और एक एकड़ की खेती में करीब ₹40,000 का खर्च आया है। लेकिन आलू ₹250 प्रति क्विंटल के हिसाब से जा रहा है, जिससे उन्हें प्रति एकड़ केवल ₹20,000 का आलू मिल रहा है। यह 10-15 सालों बाद इतना कम रेट है।
करनाल से आलू बेचने आए एक अन्य किसान श्यामलाल ने बताया कि उन्होंने 16 एकड़ में आलू की खेती की है और उनका खर्च करीब ₹45,000 प्रति एकड़ है। उन्होंने बताया, “कुछ दिन पहले आलू ₹600 प्रति क्विंटल बिका था, कल ₹400 था, लेकिन आज का रेट ₹250 से ₹300 प्रति क्विंटल मिल रहा है। हमारी तो खेती पर लगी लागत भी पूरी नहीं हो रही है।”
मुख्य वैरायटी ‘पुखराज’ सबसे ज्यादा प्रभावित:
पिपली अनाज मंडी के पूर्व प्रधान राजीव गोयल ने मौजूदा रेट्स की जानकारी देते हुए बताया कि हरियाणा में लगभग 80% किसान ‘पुखराज’ वैरायटी का आलू लगाते हैं। इस वैरायटी का रेट ₹250 से ₹400 प्रति क्विंटल के बीच है, लेकिन ज्यादातर आलू ₹250 से ₹300 प्रति क्विंटल बिक रहा है। उन्होंने बताया कि ‘कुफरी मोहन’ वैरायटी का रेट ₹400 से ₹450 है, लेकिन यह कम मात्रा में है। गोयल के मुताबिक, पिछले साल आलू के रेट ठीक थे, जिसके चलते इस बार रकबा (खेती का क्षेत्र) बढ़ गया है और यही कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण है।

इस संकट को देखते हुए किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। किसान और कमीशन एजेंट दोनों ही सरकार से भावांतर भरपाई योजना को दुरुस्त करने की अपील कर रहे हैं। इस योजना के तहत ₹600 प्रति क्विंटल के आकलन पर किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जाती है, लेकिन किसानों का कहना है कि यह पर्याप्त नहीं है और उन्हें इसका ज़्यादा फायदा नहीं मिल रहा है।
