हरियाणा की मंडियों में ‘कच्ची पर्ची’ का खेल खत्म: आज से लागू हुई नई व्यवस्था, हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार का कड़ा एक्शन
चंडीगढ़ | 1 अप्रैल, 2026
हरियाणा सरकार ने प्रदेश के किसानों के हित में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। आज यानी 1 अप्रैल 2026 से राज्य की सभी अनाज मंडियों में आढ़तियों द्वारा दी जाने वाली ‘कच्ची पर्ची’ की व्यवस्था पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब से मंडियों में फसल की खरीद के बाद किसानों को अनिवार्य रूप से डिजिटल या प्रिंटेड ‘जे-फॉर्म’ (J-Form) देना होगा।

क्यों लिया गया यह फैसला?
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद राज्य सरकार ने यह कार्रवाई की है। दरअसल, कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र सिंह लाठर द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) में यह खुलासा हुआ था कि मंडियों में कच्ची पर्ची के जरिए करोड़ों रुपये का धान घोटाला और टैक्स चोरी की जा रही है।
आढ़ती अक्सर किसानों से एमएसपी (MSP) से कम दाम पर फसल खरीदते थे और उन्हें एक साधारण कागज (कच्ची पर्ची) थमा देते थे, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में वही खरीद एमएसपी पर दिखाई जाती थी। इस व्यवस्था से न केवल सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा था, बल्कि किसानों का भी आर्थिक शोषण हो रहा था।
नई व्यवस्था की 5 बड़ी बातें:
- कच्ची पर्ची पर पाबंदी: अब किसी भी आढ़ती द्वारा हस्तलिखित या कच्ची पर्ची देना अवैध माना जाएगा।
- अनिवार्य जे-फॉर्म: फसल की तुलाई और खरीद के तुरंत बाद किसान को प्रिंटेड रसीद या जे-फॉर्म देना होगा।
- पारदर्शिता: रसीद पर दुकान का नाम, जीएसटी नंबर, तारीख, फसल की मात्रा और रेट का स्पष्ट विवरण होना अनिवार्य है।
- 24/7 हेल्पलाइन: किसानों की शिकायतों के लिए सरकार जल्द ही एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर जारी करेगी।
- गड़बड़ी पर कार्रवाई: आदेश का उल्लंघन करने वाले आढ़तियों का लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

रबी सीजन 2026: गेहूं की खरीद भी शुरू
इस नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही आज से हरियाणा में गेहूं की सरकारी खरीद भी शुरू हो गई है। इस साल गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,585 प्रति क्विंटल तय किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को ही भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाएगा।
किसानों को क्या होगा फायदा?
इस बदलाव से बिचौलियों की मनमानी खत्म होगी और किसानों को उनकी फसल का पूरा दाम (MSP) मिलेगा। साथ ही, फसल बेचने का पुख्ता कानूनी प्रमाण होने से किसानों को भविष्य में बैंक लोन या फसल बीमा का लाभ लेने में भी आसानी होगी।
