कैंसर: जब नहीं हो पा रहा था इलाज, तब आयुर्वेद ने दी नई जिंदगी!
Haryana News 24: आज के दौर में कैंसर एक ऐसी भयानक बीमारी बन चुकी है जो तेजी से अपने पैर पसार रही है। कई बार आधुनिक चिकित्सा (Allopathy) में इलाज के बाद भी जब मरीज की स्थिति में सुधार नहीं होता, तो परिवार पूरी तरह टूट जाता है। ऐसे में मानव सेवा संस्थान और आयुर्वेद एक नई उम्मीद बनकर सामने आ रहे हैं। ऐसे कई मरीजों और उनके परिजनों से बात की गई है जिन्हें डॉक्टरों ने “लायलाज” बताकर घर भेज दिया था। [01:27]
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ग्वालियर के प्रकाश बघेल की कहानी: ग्वालियर से आए प्रकाश बघेल अपनी 35 वर्षीय पुत्रवधू का इलाज करा रहे हैं। उनकी बहू के लिवर और किडनी में कैंसर फैल चुका था। डॉक्टरों ने कह दिया था कि अब केवल सेवा ही की जा सकती है। लेकिन मात्र 20 दिन की आयुर्वेदिक दवा से उन्हें 20% तक आराम मिला है और उनकी उल्टियाँ बंद हो गई हैं। [02:41]
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जयपुर के मान सिंह का अनुभव: मान सिंह अपनी बहन के लिए यहाँ आए हैं, जिन्हें चौथी स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर था। उनके शरीर पर गहरे घाव हो चुके थे। यहाँ के इलाज के बाद अब उनके घाव 60% तक सूख चुके हैं, गांठ का साइज छोटा हो गया है और उनका वजन भी बढ़ने लगा है। [05:02]
आयुर्वेद: ‘अरबदा’ और ‘कर्कट’ रोग का प्राचीन ज्ञान
आयुर्वेद में कैंसर को ‘अरबदा’ और ‘कर्कट’ रोग कहा गया है। वैद्य शिव प्रकाश आचार्य बताते हैं कि जब शरीर के अंगों में कोशिकाएं अनियंत्रित हो जाती हैं, तो प्रकृति और जड़ी-बूटियों के माध्यम से उनका उपचार संभव है। [01:40] वैद्य के अनुसार, आयुर्वेद केवल बीमारी का इलाज नहीं करता, बल्कि शरीर को स्वस्थ रखने का मार्ग भी दिखाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्थान का उद्देश्य ‘स्वदेशी’ का प्रचार करना और लोगों को सस्ता व प्रभावी इलाज देना है। [09:27]
सावधानियाँ और जीवनशैली में बदलाव
वैद्य ने समाज को संदेश दिया कि केवल इलाज पर निर्भर रहने के बजाय हमें अपनी जीवनशैली सुधारनी चाहिए: [15:44]
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जंक फूड से बचें: मैदा, मोमोज और रिफाइंड तेल का प्रयोग कम करें।
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प्राकृतिक आहार: जहर मुक्त खेती और कीटनाशक रहित भोजन को अपनाएं।
- जागरूकता: बीमारी आने से पहले ही अपनी प्रकृति और खान-पान का ध्यान रखें।
यह वीडियो हमें याद दिलाता है कि जब उम्मीद के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं, तब हमारी प्राचीन चिकित्सा पद्धति—आयुर्वेद—जीवन की नई किरण दिखा सकती है। मानव सेवा संस्थान जैसे केंद्र आज पीड़ितों के लिए संजीवनी का काम कर रहे हैं।
वीडियो लिंक: यहां देखें
