30 लाख खर्च करने के बाद सामने थी मौत, फिर आयुर्वेद ने दिया नया जीवन
Haryana News 24 (महेंद्रगढ़): चिकित्सा विज्ञान के इस दौर में हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के गांव बसई से एक ऐसी कहानी सामने आई है जो आयुर्वेद की शक्ति और परिवार के अटूट प्रेम की मिसाल पेश करती है। 70 वर्षीय भरत सिंह गुर्जर, जो कभी मौत के मुँह में पहुँच चुके थे, आज पूरी तरह स्वस्थ होकर अपने परिवार के बीच हैं। भरत सिंह गुर्जर को लगभग दो साल पहले ब्रेन हैमरेज और किडनी की गंभीर समस्या ने घेर लिया था। [03:00] उनके भतीजे (जिन्हें वे अपने बेटे की तरह मानते हैं) ने बताया कि उन्होंने बड़े अस्पतालों में ताऊ जी के इलाज के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन तक बेच दी। [10:16] मात्र डेढ़ साल के भीतर उन्होंने इलाज पर 25 से 30 लाख रुपये खर्च कर दिए, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। [03:48]
यमराज के द्वार से वापसी
भरत सिंह की हालत इतनी गंभीर थी कि वे 8-9 महीनों तक बेहोशी जैसी स्थिति में रहे। [05:47]
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ब्रेन हैमरेज: दिमाग के तीन ऑपरेशन हो चुके थे। [03:34]
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किडनी फेलियर: मरीज डायलिसिस पर था। [03:39]
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भोजन का माध्यम: मुँह से कुछ भी खाने में असमर्थ होने के कारण राइस ट्यूब (Nasal Tube) लगी हुई थी। [05:44]
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सामाजिक स्थिति: रिश्तेदारों और ग्रामीणों ने यहाँ तक कह दिया था कि अब पैसे बर्बाद करना छोड़ दो, ये बचने वाले नहीं हैं। [09:22]

मानव सेवा संस्थान (बधवाना) का कमाल
जब सब रास्ते बंद हो गए, तब परिवार ने सोशल मीडिया के माध्यम से मानव सेवा संस्थान, बधवाना के बारे में जाना।
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तीसरे दिन दिखा असर: भतीजे के अनुसार, संस्थान से आयुर्वेदिक दवा शुरू करने के मात्र तीसरे दिन ही मरीज की स्थिति में सुधार दिखने लगा। [04:44]
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बिना किसी बड़ी लागत के: जहाँ लाखों रुपये बर्बाद हो चुके थे, वहां मात्र कुछ हजार रुपयों की आयुर्वेदिक दवाओं ने काम कर दिखाया। [08:40]
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आज की स्थिति: आज भरत सिंह गुर्जर बिना किसी ट्यूब के खुद खाना खाते हैं, चल-फिर सकते हैं और अपने दैनिक कार्य स्वयं करते हैं। [13:12] उनकी सभी रिपोर्ट अब नॉर्मल हैं और दवा बंद हो चुकी है। [06:17]
रिश्तों की मिसाल: ताऊ के लिए बेटा बना भतीजा
इस कहानी का एक और भावुक पहलू यह है कि भरत सिंह की देखभाल करने वाला उनका सगा बेटा नहीं, बल्कि भतीजा है। भतीजे ने बताया कि उसके माता-पिता के देहांत के बाद ताऊ जी ने ही उसे पाला था, और आज जब उन पर संकट आया, तो भतीजे ने अपनी जमीन बेचकर और दिन-रात सेवा कर अपना फर्ज निभाया। [11:04]
आयुर्वेद और विश्वास की जीत
भरत सिंह गुर्जर का मामला उन लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं। यह वीडियो संदेश देता है कि सही परहेज, आयुर्वेद पर विश्वास और अपनों की सेवा किसी भी नामुमकिन स्थिति को मुमकिन बना सकती है।
“दवाई से ज्यादा विश्वास काम करता है और अगर किस्मत अच्छी हो तो राख की चुटकी भी दवा बन जाती है।” [10:10]
नोट: यह लेख वीडियो में दिए गए दावों और साक्षात्कार पर आधारित है। वीडियो स्रोत: हरियाणा न्यूज़ 24
