असली समाजसेवी! करोड़ों की दौलत बेटियों की शिक्षा पर न्योछावर, खानपुर यूनिवर्सिटी में बनाई करोड़ों की डिजिटल लाइब्रेरी..
सोनीपत, हरियाणा: शिक्षा और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित करते हुए, सोनीपत के खानपुर स्थित भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय में एक अत्याधुनिक डिजिटल लाइब्रेरी का लोकार्पण किया गया। इस भव्य लाइब्रेरी का उद्घाटन हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और प्रसिद्ध समाजसेवी व कालूवाला कंस्ट्रक्शन के मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल सांगवान द्वारा किया गया।

करोड़ों की लागत और विश्वस्तरीय सुविधाएं:
करोड़ों रुपये की लागत से तैयार यह लाइब्रेरी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। इसमें 120 से अधिक कंप्यूटर (PCs), हाई-स्पीड वाई-फाई और एयर कंडीशनिंग की सुविधा उपलब्ध है [05:54]। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, यह इस संस्थान की पहली डिजिटल लाइब्रेरी है, जहाँ एक साथ लगभग 180 से 190 छात्राएं बैठकर पढ़ाई कर सकती हैं [03:03]।

24×7 सेवा और छात्राओं में उत्साह:
विश्वविद्यालय की छात्राओं ने इस पहल का स्वागत करते हुए भारी उत्साह दिखाया है। छात्राओं का कहना है कि यह लाइब्रेरी उनके लिए 24 घंटे और सातों दिन (24*7) खुली रहेगी, जिससे वे अपनी सुविधानुसार कभी भी आकर शोध और अध्ययन कर सकेंगी [12:53]। रिसर्च स्कॉलर्स के लिए ई-रिसोर्सेज (E-resources) की उपलब्धता को एक बड़ा वरदान बताया गया है, जो उनके शैक्षणिक भविष्य को उज्जवल बनाने में सहायक होगा [10:26]।

अनिल सांगवान: समाज सेवा में एक मिसाल:
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा और अन्य बुद्धिजीवियों ने अनिल सांगवान के प्रयासों की जमकर सराहना की। बताया गया कि अनिल सांगवान अब तक पूरे भारत में लगभग 150 लाइब्रेरी और कई खेल स्टेडियम बनवा चुके हैं [05:46]। वक्ताओं ने उन्हें “भगवान का भेजा हुआ परिंदा” बताते हुए कहा कि वे शिक्षा, खेल और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपना धन पानी की तरह बहा रहे हैं, जो समाज के लिए एक प्रेरणा है [03:18]।

शिक्षा मंत्री का संबोधन
शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में स्थापित इस विश्वविद्यालय के लिए यह डिजिटल लाइब्रेरी एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म साबित होगी। इससे छात्राओं को आधुनिक तकनीक से जुड़ने और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा [00:47]।
विश्वविद्यालय की कुलपति और अन्य प्रोफेसरों ने भी इसे एक ऐतिहासिक कदम बताया और सीएसआर (CSR) के तहत समाज को वापस देने की इस सोच की प्रशंसा की [06:53]।
