फर्जी डिग्री, फर्जी नाम: पहचान बदलकर 20 साल तक की सरकारी नौकरी, रिटायर्ड शिक्षक पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज
हरियाणा के फरीदाबाद जिले में जालसाजी और धोखाधड़ी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सराय ख्वाजा थाना पुलिस ने एक सेवानिवृत्त शिक्षक के खिलाफ फर्जी दस्तावेजों और नाम बदलकर करीब दो दशक तक शिक्षा विभाग को गुमराह करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की है। आरोपी ने न केवल अपनी पहचान छिपाई, बल्कि सेना में सेवा के दौरान ही संदिग्ध रूप से बीएड की डिग्री भी हासिल कर ली।
- प्रिंसिपल की शिकायत पर कार्रवाई
यह कार्रवाई राजकीय मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सराय ख्वाजा के प्रिंसिपल कैलाश चंद की शिकायत पर की गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी ललित भारद्वाज वर्ष 2004 में हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (HSSC) के माध्यम से ‘एसएस मास्टर’ के पद पर भर्ती हुआ था। वह हाल ही में अपनी सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हुआ है।

- सीएम विंडो पर शिकायत से खुला राज
धोखाधड़ी का यह खेल साल 2020 और 2021 में ‘सीएम विंडो’ पर हुई शिकायतों के बाद उजागर हुआ। जांच में पाया गया कि आरोपी का वास्तविक नाम लालाराम (पुत्र शिव कुमार) है। उसकी 10वीं, 12वीं और स्नातक (BA) तक की पढ़ाई इसी नाम से पूरी हुई थी, लेकिन सरकारी नौकरी उसने ललित भारद्वाज के नाम से हासिल की।
- सेना में रहते हुए ली ‘नियमित’ डिग्री
मामले में सबसे गंभीर मोड़ तब आया जब जांच में पता चला कि आरोपी ने 1987 से 1999 तक भारतीय सेना में लिपिक (क्लर्क) के पद पर कार्य किया था। आरोप है कि सेना में अपनी नियमित ड्यूटी के दौरान ही उसने वर्ष 1994 में शिलांग (मेघालय) से ‘नियमित’ (Regular) बीएड की डिग्री प्राप्त की। नियमानुसार, सेना की सेवा के दौरान कोई भी कर्मचारी नियमित छात्र के रूप में डिग्री हासिल नहीं कर सकता। इसके अलावा, बीएड की डिग्री में पिता का नाम गायब होने और बीए के आधार पर डिग्री न होने से इसके फर्जी होने का संदेह गहरा गया है।
- धारा 420 के तहत मामला दर्ज
खंड शिक्षा अधिकारी बल्लभगढ़ और शिक्षा निदेशालय की लंबी जांच रिपोर्ट के बाद, पुलिस ने ललित भारद्वाज के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। सराय ख्वाजा थाना पुलिस के अनुसार, मामले की गहनता से जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी ने इतने वर्षों के दौरान सरकार से कितनी सैलरी और सेवानिवृत्ति के लाभ प्राप्त किए हैं। विभाग अब आरोपी से सरकारी धन की रिकवरी की प्रक्रिया भी शुरू कर सकता है।
